संत का ज्ञान, आखिर जलन क्यों होती है ? Short Motivational story in Hindi

आज की कहानी का शीर्षक हैं “संत का ज्ञान, आखिर जलन क्यों होती है ?” हर इंसान के भीतर जलन मौजूद होती है लेकिन हम हमेशा उसे ढक कर रखते हैं ताकि कोई हमें बुरा ना समझ लें । लेकिन जो व्यक्ति अपने भीतर उठने वाली उस जलन को देख लेता है, वही उसका समाधान भी कर सकता है । आज की कहानी एक ऐसे ही व्यक्ति की कहानी है, जिसने अपनी जलन को पहचाना और खुद को सुधारने का निश्चय भी किया ।
संत का ज्ञान, आखिर जलन क्यों होती है ? Motivational story in Hindi
एक महान संत पहाड़ों की कंदराओं में निवास करते थे । इसलिए जिसे भी उनके पास आना पड़ता था, बड़ा कष्ट उठा कर आना पड़ता था । एक बार संत तपस्या कर रहे थे, तभी एक व्यक्ति पहाड़ चढ़कर उनके पास आया, वह बहुत हॉफ रहा था क्योंकि पहाड़ की ऊचाँई बहुत ज्यादा थी ।
संत ने आँखें खोली और व्यक्ति को देखकर बोले- लगता है तुम बहुत थक गए हो, यह लो थोड़ा जल पी लो ।
व्यक्ति ने झट जल को ग्रहण किया और कुछ देर के लिए वहीं पर बैठ गया । जब उसकी थकान उतर गई तब उसने संत को प्रणाम किया ।
व्यक्ति बोला- बाबा, मैं इतना कष्ट सहकर आपके पास इसीलिए आया हूंँ, ताकि आप मेरी समस्या का निवारण कर सको ।
संत बोले- सांसारिक मनुष्य की समस्या तो यही होती है पैसा, परिवार या समाज में प्रतिष्ठा पाना ।
व्यक्ति बोला- महाराज, मेरे पास धन की कोई कमी नहीं है । मेरा परिवार भी बहुत अच्छा है और समाज में मेरी बहुत प्रतिष्ठा भी है ।
संत बोले- तो फिर तुम्हें क्या समस्या है ?
व्यक्ति बोला- बाबा इतना कुछ पाने के बाद भी, मुझे लोगों से बहुत ईर्ष्या होती है और यह जलन दिन-रात मुझे ही खाई जाती है । यदि मैं किसी के पास अपने से ज्यादा धन देखता हूंँ तो मुझे क्रोध आ जाता है । कितना ही खुद को समझता हूंँ, पर समझ नहीं पाता कि क्यूँ यह जलन भीतर से नहीं जाती ? मुझे हमेशा आत्मग्लानि महसूस होती है, क्योंकि मेरे आस-पास वालों के भीतर तो बिल्कुल भी जलन नहीं है तो आखिर मेरे भीतर क्यों ?
यह भी पढ़े :- एक बिजनेसमैन और नाव वाले की कहानी – Motivational Story in Hindi
संत बोले- तुम्हें परेशान होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है, यह तो मनुष्य की प्रकृति होती है:-काम, क्रोध, मोह-माया ईर्ष्या ।इससे कोई भी मनुष्य बच नहीं सकता । हर सांसारिक मनुष्य के भीतर यह सब मौजूद रहता है अच्छी बात यह है कि तुम्हें अपनी जलन पूरी तरह से दिख गई है, वरना लोगों को तो अपने भीतर कोई कमी ही नहीं दिखाई देती ।
व्यक्ति बोला- बाबा, मैं यह जानना चाहता हूंँ कि जलन क्या है? और यह क्यों होती है ?
संत बोले- जब व्यक्ति दूसरे को खुद से अलग समझता है तब जलन उत्पन्न होती है! अब तुम मुझे बताओ क्या तुम्हें कभी अपने पुत्र से जलन हो सकती है?
व्यक्ति बोला- नहीं बाबा, मेरा पुत्र अभी छोटा-सा बालक है, मैं कैसे उस जल सकता हूंँ !!!
संत बोले- यह तुम्हारा भ्रम है कि तुम उससे इसलिए नहीं जलते कि वह तुम्हारा पुत्र है । असल में बात यह है तुम उसे खुद से भिन्न नहीं समझते क्योकि जीवन के प्रति उसके अपने कोई-भी विचार नहीं है लेकिन जैसे ही उसकी आयु बढ़ेगी और तुम्हारा पुत्र जीवन के प्रति अपना एक नजरिया तुम्हारे सामने रखेगा, जो कि तुम्हारी बातो से बिल्कुल नहीं मिलता होगा, तो उस दिन तुम्हें अपने पुत्र से भी जलन होने लगेगी ।
व्यक्ति बोला- बाबा आप ही मुझे बताइए ? मैं क्या करूँ? क्या मनुष्य अपनी प्रकृति से लड़ सकता है ?
संत बोले- नहीं, कोई भी मनुष्य अपनी प्रकृति से लड़ नहीं सकता, लेकिन उसे समझ जरुर जाता है । जो समझ जाता है वह प्रकृति से लड़ना छोड़ देता है ।
यह भी पढ़े :- गौतम बुद्ध और अंगुलिमाल की कहानी
व्यक्ति बोला- आप मुझे बताइए ? प्रकृति को कैसे समझा जाता है?
संत बोले- तुम्हे ये समझण होगा की कोई चाहे कितना भी धनवान हो या प्रतिष्ठित हो, लेकिन उसके बावजूद भी हमारी जड़े एक है । हम सब ईश्वर से उत्पन्न हुए हैं और किसी में कोई भी भेद नहीं है । कोई ऊपर नहीं है, नीचे नहीं है, कोई सुंदर नहीं है, कोई असुंदर नहीं है । जैसे ईश्वर एक है वैसे ही सभी मनुष्य के अंदर सभी गुण भी एक है, तुम्हे बस अपने भीतर उठने वाली जलन को साक्षी होकर देखना होगा, ऐसे की किसी और को देख रहे हो । जब हम उसका होना देख लेंगे तब वह भीतर से धीरे-धीरे गायब होने लगेगी ।
व्यक्ति बोला- हाँ बाबा, आप सत्य कह रहे हो । मेरे जलने का कारण यही है कि मैं लोगों को खुद से अलग समझता हूंँ । लेकिन आपके ज्ञान के द्वारा अब मैं समझ रहा हूंँ कि किसी से जलना व्यर्थ ही है, ऐसा करके मैं दिन-रात खुद को ही कष्ट दे रहा हूँ । मैं ख़ुद को अब साक्षी भाव से देखूँगा। मेरा इतना दूर आना सफल रहा ।
व्यक्ति ने संत को प्रणाम किया और वह वापस अपने घर की तरफ लौट गया ।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जलन कैसे हमें दुख की आग में तपाती है, और यही जलन बढ़कर अपराध में भी बदल जाती है इसलिए दूसरों को हमेशा खुद की तरह देखो । ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद करने की कोशिश करो, ऐसा करने से आपकी जलन की प्रवृत्ति धीरे-धीरे कम हो जायेंगी ।
उम्मीद करते है आपको हमारी संत का ज्ञान Motivational Story in Hindi “आखिर जलन क्यों होती है ?” पसन्द आयी होगी । आप हमें social media पर भी follow कर सकते हैं CRS Squad, Think Yourself और Your Goal